संगरूर/एसएएस नगर, 19 मई 2026 (azadvaani) आज अध्यापक संगठनों डी.टी.एफ. (दिग्विजय पाल) और डी.टी.एफ. (संबंधित डी.एम.एफ.) के नेताओं ने संयुक्त रूप से दाता सिंह नमोल और सुखविंदर गिर की अगुवाई में संगरूर के डी.सी. से मुलाकात की। इस दौरान एसएएस नगर के शिक्षकों ने भी गैर-शैक्षणिक ड्यूटियों के मुद्दे पर अपना समर्थन और रोष व्यक्त किया।नेताओं ने मांग की कि जिला प्रशासन द्वारा अध्यापकों की जनगणना, ड्रग सेंसेस और नगर परिषद चुनावों में लगाई गई दोहरी-तिहरी गैर-शैक्षणिक ड्यूटियों को समाप्त किया जाए।गंभीर बीमारियों से पीड़ित, दिव्यांग तथा छोटे बच्चों की माताओं की श्रेणी में आने वाले अध्यापकों की ये ड्यूटियां हटाई जाएं तथा जनगणना ड्यूटी के लिए अन्य जिलों की तर्ज पर अध्यापकों को स्कूल ड्यूटी से मुक्त किया जाए।लेकिन डी.सी. संगरूर द्वारा इस मामले में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। अध्यापक नेताओं ने डी.सी. संगरूर के इस रवैये की कड़ी निंदा की।उन्होंने कहा कि एक ओर पंजाब सरकार कथित ‘शिक्षा क्रांति’ के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर अध्यापकों की दोहरी-तिहरी गैर-शैक्षणिक ड्यूटियां लगाकर जहां सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब विद्यार्थियों को शिक्षा से वंचित किया जा रहा है, वहीं अध्यापकों पर शारीरिक और मानसिक अत्याचार भी किया जा रहा है।संगरूर और एसएएस नगर के शिक्षकों ने कहा कि लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने से स्कूलों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ रहा है।इससे सरकार का जनविरोधी चेहरा उजागर हो रहा है और ‘शिक्षा क्रांति’ के किए जा रहे झूठे दावों की भी पोल खुल रही है। प्रशासन के रवैये के विरोध में दोनों संगठनों के नेताओं ने फैसला किया कि इस संबंध में 20 मई को एक विशाल रोष प्रदर्शन किया जाएगा।
संगरूर और एसएएस नगर के शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक ड्यूटियों का बोझ, विद्यार्थी शिक्षा से वंचित












