मोहाली, 25 सितंबर: भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER) मोहाली में विज्ञान, तकनीक, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण शोध एवं विकास कार्यक्रम आगे बढ़ रहे हैं। संस्थान में क्वांटम टेक्नोलॉजी, मौसम पूर्वानुमान, स्टार्टअप इनक्यूबेशन और विद्यार्थियों के लिए प्रायोगिक नवाचार जैसी पहलों पर काम किया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य अत्याधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान को व्यावहारिक तकनीकों और समाजोपयोगी समाधानों में बदलना है।
IISER मोहाली के डॉ. संदीप के. गोयल क्वांटम सूचना के प्रसंस्करण, भंडारण और संचार से जुड़ी तकनीकों पर शोध कर रहे हैं। उनका कार्य फोटोनिक क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम कम्युनिकेशन और क्वांटम मेमोरी जैसे क्षेत्रों को जोड़ता है। उनका शोध भारत में विकसित हो रहे क्वांटम टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम के लिए ऐसी तकनीकों पर केंद्रित है, जिनसे भविष्य में क्वांटम कंप्यूटरों और क्वांटम नेटवर्कों को आपस में जोड़ा जा सके।
क्वांटम नेटवर्क के सामने एक बड़ी चुनौती क्वांटम सूचना को लंबी दूरी तक सुरक्षित रूप से पहुंचाना है। सामान्य डिजिटल सिग्नल की तरह क्वांटम सूचना को कॉपी या आसानी से बढ़ाया नहीं जा सकता। इसी समस्या के समाधान के लिए क्वांटम रिपीटर नेटवर्क विकसित करने पर काम किया जा रहा है, जिसमें क्वांटम मेमोरी सूचना को अस्थायी रूप से सुरक्षित रख सकती है और अलग-अलग नेटवर्क लिंक को जोड़ने में मदद कर सकती है। डॉ. गोयल राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के सहयोग से बहु-नोड क्वांटम रिपीटर नेटवर्क से संबंधित परियोजना के प्रधान अन्वेषक हैं।
फोटोनिक क्वांटम कंप्यूटिंग भी इस शोध का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें क्वांटम सूचना को प्रकाश के गुणों में एन्कोड कर प्रोसेस किया जाता है। डॉ. गोयल का समूह continuous-variable photonic architectures और Gottesman-Kitaev-Preskill (GKP) encoded quantum states जैसे क्षेत्रों पर काम कर रहा है। क्वांटमफ्लुएंस प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से विकसित हो रही तकनीकों में क्वांटम-स्टेट जेनरेशन, फोटोनिक सर्किट, डिटेक्शन और क्लासिकल कंट्रोल को एकीकृत करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
वहीं, IISER मोहाली का Weather and Climate Modelling Research Group (WeCLiMb), डॉ. राजू अटाडा के नेतृत्व में पंजाब के लिए उच्च-रिजॉल्यूशन, अल्पकालिक मौसम पूर्वानुमान प्रणाली विकसित कर रहा है। यह प्रणाली लगभग 3 किलोमीटर के स्थानिक रिजॉल्यूशन पर तीन दिन तक का पूर्वानुमान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है। इसमें वर्षा, तापमान, आर्द्रता और हवा की स्थानीय परिस्थितियों में होने वाले बदलावों को अधिक बारीकी से समझने का प्रयास किया जा रहा है।
इस मौसम प्रणाली का उद्देश्य पंजाब के अलग-अलग क्षेत्रों में मौसम की स्थानीय विविधताओं को बेहतर तरीके से समझना है। शोध मंच पर प्रति घंटे तथा दैनिक वर्षा, अधिकतम और न्यूनतम तापमान, आर्द्रता और हवा से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। साथ ही जिला स्तर पर वर्षा चेतावनी की सुविधा भी विकसित की गई है। टीम मौसम संबंधी जानकारी और बुलेटिन को पंजाबी, हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम कर रही है।
IISER मोहाली में विद्यार्थियों की रचनात्मकता और व्यावहारिक वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए Innovation Lab स्थापित करने की पहल भी की गई है। संस्थान के Foundation Day समारोह के दौरान प्रस्तावित इस लैब का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपने विचारों पर प्रयोग करने, प्रोटोटाइप तैयार करने और उन्हें शोध, इनक्यूबेशन अथवा उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए संसाधन उपलब्ध कराना है। लैब में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, IoT, नवीकरणीय ऊर्जा, बायोमेडिकल डिवाइस और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे विभिन्न क्षेत्रों में काम की संभावनाएं होंगी।
इसके साथ ही IISER मोहाली के i-RISE Technology Business Incubator को तकनीक आधारित स्टार्टअप और डीप-टेक उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए नई वित्तीय सहायता मिली है। दस्तावेज के अनुसार, i-RISE TBI को कुल ₹3.425 करोड़ की नई फंडिंग मिली है, जिसमें DBT-BIRAC BioNEST परियोजना के लिए ₹3 करोड़ तथा Chandigarh Startup Policy 2025 के तहत ₹42.5 लाख का अनुदान शामिल है। BioNEST परियोजना का उद्देश्य स्वास्थ्य और स्वच्छ ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में जैव-प्रौद्योगिकी आधारित उद्यमों के विकास और व्यावसायीकरण को समर्थन देना है।
i-RISE TBI में अब तक 55 से अधिक तकनीक आधारित स्टार्टअप को इनक्यूबेट किए जाने का उल्लेख किया गया है। ये स्टार्टअप बायोटेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, लॉजिस्टिक्स, एग्रीटेक, फूड टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। Startup India Seed Fund Scheme के तहत भी इनक्यूबेटर द्वारा स्टार्टअप को समर्थन दिया गया है और दस्तावेज के अनुसार, इन पहलों से जुड़े उद्यमों ने सामूहिक रूप से 500 से अधिक रोजगार सृजित किए हैं।
IISER मोहाली की इन पहलों से संस्थान में बुनियादी वैज्ञानिक अनुसंधान, अत्याधुनिक तकनीक, मौसम विज्ञान, छात्र नवाचार और स्टार्टअप विकास को एक साथ आगे बढ़ाने की दिशा दिखाई देती है। क्वांटम कंप्यूटिंग और क्वांटम नेटवर्क से लेकर स्थानीय मौसम पूर्वानुमान तथा विद्यार्थियों के प्रोटोटाइप विकास तक, विभिन्न परियोजनाएं शोध को व्यावहारिक उपयोग से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। संस्थान का लक्ष्य वैज्ञानिक ज्ञान, तकनीकी विकास, उद्योग सहयोग और युवा शोधकर्ताओं के प्रशिक्षण के माध्यम से एक मजबूत नवाचार एवं तकनीकी इकोसिस्टम को विकसित करना है।












