पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने वीजा धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में आरोपी महिला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि विदेश भेजने के नाम पर लोगों से ठगी करना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है।
मामले के अनुसार महिला पर आरोप है कि उसने विदेश भेजने का झांसा देकर एक व्यक्ति से करीब 18 लाख रुपये की राशि ले ली। पीड़ित को वीजा दिलाने और विदेश में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया था।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि पैसे लेने के बाद आरोपी महिला ने लंबे समय तक उसे टालमटोल किया और न तो वीजा की व्यवस्था की और न ही रकम वापस की। इसके बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान कई अहम दस्तावेज और साक्ष्य सामने आए, जिनसे धोखाधड़ी की आशंका मजबूत हुई।
आरोपी महिला ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी। उसके वकील ने अदालत में दलील दी कि महिला निर्दोष है और उसे झूठे मामले में फंसाया गया है।
हालांकि अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में आरोप गंभीर हैं और जांच को प्रभावित होने से रोकना जरूरी है।
हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि विदेश भेजने के नाम पर ठगी के मामले समाज में लगातार बढ़ रहे हैं और इससे आम लोगों का भरोसा टूटता है।
अदालत ने याचिका को निराधार मानते हुए आरोपी महिला पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। साथ ही यह राशि संबंधित प्राधिकरण में जमा कराने का निर्देश दिया गया।
अदालत ने पुलिस को मामले की निष्पक्ष और गहन जांच जारी रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
इस फैसले को ऐसे मामलों में सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि वीजा धोखाधड़ी और विदेश भेजने के नाम पर ठगी करने वालों को कानून से राहत मिलना आसान नहीं होगा।












