पंचकूला — मिनिमली इनवेसिव सर्जरी के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि दर्ज करते हुए Park Hospital Panchkula ने सर्जिकल ग्लू की मदद से ट्राइसिटी की पहली लेप्रोस्कोपिक इनगुइनल हर्निया सर्जरी सफलतापूर्वक की है। यह आधुनिक तकनीक मेश फिक्सेशन और पेरिटोनियल फ्लैप क्लोजर में उपयोग की गई, जिससे उपचार प्रक्रिया अधिक उन्नत और मरीज-अनुकूल बनी है।
यह जटिल सर्जरी अस्पताल के लेप्रोस्कोपिक और जनरल सर्जरी विभाग के निदेशक एवं विभागाध्यक्ष Dr. Suvir K. Gupta और उनकी अनुभवी टीम द्वारा सफलतापूर्वक संपन्न की गई। इस उपलब्धि को क्षेत्र में सर्जिकल नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस नई प्रक्रिया की खास बात यह है कि इसमें पारंपरिक टांकों और कांटेदार टांकों की आवश्यकता नहीं पड़ती। सर्जिकल ग्लू के इस्तेमाल से न केवल सर्जरी अधिक सटीक बनती है, बल्कि मरीज को कम दर्द और तेज रिकवरी का लाभ भी मिलता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पारंपरिक तरीकों की तुलना में इस तकनीक से ऊतकों को कम नुकसान पहुंचता है और ऑपरेशन का समय भी कम हो जाता है। इसके चलते मरीज को ऑपरेशन के बाद जल्दी सामान्य जीवन में लौटने में सहायता मिलती है।
डॉ. गुप्ता ने इस उपलब्धि पर कहा कि आधुनिक और साक्ष्य-आधारित तकनीकों को अपनाना समय की मांग है। इससे न केवल उपचार के परिणाम बेहतर होते हैं, बल्कि उन्नत चिकित्सा सेवाएं अधिक सुलभ और किफायती भी बनती हैं।
इस प्रक्रिया के प्रमुख लाभों में ऑपरेशन के बाद कम दर्द, कम समय में सर्जरी पूरी होना और कुल मिलाकर किफायती इलाज शामिल हैं। यह तकनीक भविष्य में हर्निया सर्जरी के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित कर सकती है।
विशेषज्ञों ने हर्निया को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि शरीर में किसी भी असामान्य सूजन या दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
यदि वजन उठाते समय या खांसते वक्त दर्द महसूस हो, तो इसे हल्के में न लें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर इलाज न कराने पर हर्निया गंभीर रूप ले सकता है।
स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी हर्निया से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। संतुलित वजन बनाए रखना और अत्यधिक शारीरिक तनाव से बचना जरूरी है।
अंत में विशेषज्ञों ने सलाह दी कि मरीजों को हमेशा ऐसे अस्पतालों का चयन करना चाहिए, जहां मिनिमली इनवेसिव सर्जरी में विशेषज्ञता और आधुनिक तकनीकों की सुविधा उपलब्ध हो, ताकि बेहतर और सुरक्षित उपचार सुनिश्चित किया जा सके।





