चंडीगढ़ के सेक्टर-45 में अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई को लेकर स्थानीय निवासियों में नाराजगी देखने को मिली। प्रशासन द्वारा कुछ मकानों में किए गए अतिरिक्त निर्माण को हटाने के लिए नोटिस जारी किए जाने के बाद लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया।
निवासियों का कहना है कि उन्होंने अपने परिवार की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए घरों में छोटे-मोटे बदलाव किए हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन इन जरूरत आधारित बदलावों को भी अवैध मानकर हटाने की कार्रवाई कर रहा है।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने घरों के बाहर एकत्र हुए और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। लोगों ने मांग की कि बिना किसी वैकल्पिक समाधान के तोड़फोड़ की कार्रवाई करना उचित नहीं है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई मकान वर्षों से इसी स्थिति में हैं और अचानक कार्रवाई शुरू होने से लोगों में डर और असमंजस की स्थिति बन गई है। उन्होंने प्रशासन से इस मामले में संवेदनशीलता दिखाने की अपील की।
इस मुद्दे पर क्षेत्र के सांसद मनीष तिवारी ने भी निवासियों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में कई परिवारों ने अपनी जरूरतों के अनुसार घरों में बदलाव किए हैं, जिन्हें पूरी तरह अवैध मानना उचित नहीं है।
मनीष तिवारी ने सुझाव दिया कि प्रशासन को इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए एक स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जरूरत आधारित निर्माण को नियमित करने पर विचार किया जाना चाहिए।
सांसद ने यह भी कहा कि अगर प्रशासन और निवासियों के बीच संवाद स्थापित किया जाए तो इस समस्या का बेहतर समाधान निकाला जा सकता है। इससे अनावश्यक विवाद और तनाव से भी बचा जा सकेगा।
वहीं प्रशासन का कहना है कि शहर की मूल योजना और भवन नियमों का पालन करना जरूरी है। अधिकारियों के अनुसार अवैध निर्माण से शहर की संरचना और सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है।
प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि नियमों के तहत ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी कहा गया है कि निवासियों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाए जाएंगे।
इस घटना के बाद सेक्टर-45 में माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण रहा, लेकिन स्थानीय लोग अब भी उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन उनकी समस्याओं को समझते हुए कोई व्यावहारिक समाधान निकालेगा।












